“संत चरणों की महिमा: जैन मुनियों के आगमन से पावन हुआ स्थल”
जैन मुनि विशुद्ध सागर महाराज के आगमन पर नगरवासियों में दिखा उत्साह का लहर


नवापारा-राजिम :- संत के दर्शन से मन पावन, और चरण रज से धरा धन्य होती है रविवार को यह कहावत नवापारा नगर में जीवन्त हो उठी, जब जैन मुनि विशुद्ध सागर महाराज जी सहित 24 मुनियो का पावन पदार्पण पंचकल्याणक को लेकर नगर की पावन धरती पर हुआ। मुनि श्री के आगमन पर नवापारा शहर में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का वातावरण देखने को मिला। बैंड बाजा,धुमाल बाजा सहित कई प्रकार के वाद्य यंत्रो से पूरा शहर गुंज उठा। सुबह से ही नगर के कण-कण में भक्ति की सुगंध फैल गई। जैन समाज के श्रद्धालुओं ने अपने घरो एवं दुकान के सामने तथा चौक-चौराहों पर पाटा बिछाकर, चरणामृत ग्रहण कर मुनि श्री का आत्मीय स्वागत करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया। जहाँ भक्ति हो, वहाँ व्यवस्था अपने आप बन जाती है—यह दृश्य हर कदम पर देखने को मिला। महिलाओं एवं युवाओं का अनुशासित उत्साह ने इस क्षण को अविस्मरणीय बना दिया। इस ऐतिहासिक स्वागत में ब्राह्मण समाज ,सिंधी समाज,गुजराती समाज, सिक्ख समाज, माहेश्वरी समाज सहित सर्व समाज ने एकजुट होकर सहभागिता निभाई। संत किसी एक समाज के नहीं, समूचे समाज की धरोहर होते हैं इस भाव को नगरवासियों ने कर्म में उतार दिया। राजिम विधायक रोहित साहू, अभनपुर विधायक इंद्रकुमार साहू,पूर्व विधायक संतोष उपाध्याय,नगर पालिका अध्यक्ष ओमकुमारी-संजय साहू सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मुनि श्री का सम्मान कर आशीर्वाद लिया और उनके विचारों को समाज के लिए पथ प्रदर्शक बताया। मुनि विशुद्ध सागर महाराज जी के दर्शन से वातावरण खुशनुमा रहा। नगरवासियों का कहना था कि ऐसे संतों का सान्निध्य जीवन में सत्य, अहिंसा और संयम की लौ प्रज्वलित करता है। आयोजन के दौरान अनुशासन, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का जो संगम देखने को मिला, उसने यह सिद्ध कर दिया कि नवापारा केवल एक नगर नहीं, बल्कि संस्कारों की जीवंत भूमि है। जहाँ संत आएँ, वहाँ कलह नहीं, केवल कल्याण होता है। मुनि श्री के नवापारा पदार्पण ने नगर के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया, जिसे आने वाली पीढ़ियाँ भी श्रद्धा से स्मरण करेंगी।
नगर हुआ भक्ति और श्रद्धा से भाव विभोर



जैन मुनि विशुद्ध सागर महाराज जी के आगमन से नगर पूरी तरह श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के रंग में रंगा नजर आया। मुनि श्री के स्वागत, सत्कार एवं सम्मान के लिए सुबह से ही पूरे शहर में उल्लास और खुशियां देखी गई। शहर उमड़ पड़ा और हर वर्ग, हर समाज के लोगों ने सहभागिता कर इसे ऐतिहासिक बना दिया। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी संख्या इस पावन अवसर की साक्षी बनी। मुनि श्री के आगमन पर नगर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार देखने को मिला। उनके दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं के चेहरे पर शांति और संतोष झलकता रहा। उनके आगमन के दौरान अनुशासन, व्यवस्था और श्रद्धा का अदभुत समन्वय देखने को मिला, जिसने इस पदार्पण को नगर के इतिहास में अविस्मरणीय बना दिया। नगरवासियों ने मुनि श्री के नवापारा आगमन को धार्मिक सौभाग्य बताते हुए कहा कि ऐसे संतों का सान्निध्य समाज को सत्य, अहिंसा और संयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मुनि विशुद्ध सागर महाराज जी के स्वागत में उमड़ा जनसैलाब ने यह स्पष्ट कर दिया कि नवापारा नगर धार्मिक सदभाव सामाजिक एकता और संस्कारों की सशक्त परंपरा को जीवंत रूप से निभा रहा है। स्वागत के लिए पूरा नगर पोस्टर,फ्लैक्स,बैनर से सजा हुआ है।

इस दौरान मुनि श्री के स्वागत के लिए राजिम विधायक रोहित साहू,अभनपुर विधायक इंद्रकुमार साहू,नगर पालिका अध्यक्ष ओमकुमारी-संजय साहू, मंडल अध्यक्ष नागेंद्र वर्मा, जिला पंचायत के पूर्व सदस्य चंद्रशेखर साहू,वरिष्ठ भाजपा नेता राजू साहू, नपा उपाध्यक्ष भूपेंद्र सोनी,परदेशी राम साहू,मुकुंद मेश्राम, टिंकु संजीव सोनी, बॉबी चांवला,सहदेव कंसारी, सौरभ सिंटु जैन, प्रेम साधवानी, योगिता सिन्हा,हर्षा कंसारी, किशोर जैन, पंचकल्याणक समिति के अध्यक्ष मनोज जैन,उपाध्यक्ष रमेश चौधरी, नरेंद्र चौधरी,निर्मल जैन, जैन समाज के अध्यक्ष अखिलेश जैन, अनिल जैन, आशीष चौधरी, आशीष जैन, आलोक पहाड़िया, जिला पंचायत सदस्य यशवंत साहू, नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष धनराज मध्यानी, पूर्व उपाध्यक्ष जीत सिंग, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रामा यादव, मंगराज सोनकर, ब्राम्हण समाज के वरिष्ठ आर बी शर्मा,पूर्व विधायक संतोष उपाध्याय,मधुसुदन शर्मा, वेदप्रकाश तिवारी ,श्याम किशोर शर्मा,कैलाश शुक्ला,प्रसन्न शर्मा,रमेश तिवारी, ,सौरभ शर्मा,अशोक तिवारी,अजय तिवारी, शिव तिवारी, सुभाष शर्मा, हिमांशु दुबे ,श्रीनिवास शुक्ला, दिनेश तिवारी,चंद्रिका शर्मा,ज्ञानेश शर्मा,महेश तिवारी,सौरभ उपाध्याय,हिमांशु दुबे,कैलाश तिवारी, मनहरण तिवारी,जितेंद्र भट्ट,पीयूष शर्मा,अंजय शर्मा,अखिलेश शर्मा,अतुल शर्मा,प्रशांत मिश्र,कमल शर्मा, दिनेश शर्मा, सुभाषिनी शर्मा,रेखा तिवारी,रुचि शर्मा,तारणी शर्मा,आयुषी शर्मा,रश्मि तिवारी,अंजू तिवारी,रेणुका तिवारी,प्रतिभा शर्मा,भुवनेश्वरी शर्मा,पुष्पांजलि तिवारी,स्वाती उपाध्याय,अनामिका तिवारी,प्रीति शर्मा,स्मिता शर्मा,डा. विजय शर्मा, अंजय शर्मा, नीरजा पाण्डेय, रानी पाण्डेय , बलविंदर सिंह, सुरेंद्र सिंह, जीत सिंह, बॉबी चावला, राजा चावला, स्वर्णजीत कौर, गुरमीत कौर, सिमरन कौर, सोमी कौर, बिल्ला सरदार, मनराज चावला, अनमोल दीप सिंह,विक्की छाबड़ा,गुरप्रीत कौर, साज चावला, प्रिंस, परमजीत, सक्षम जीत सहित सैकड़ो की संख्या में स्वागत के लिए शहरवासी पहुंचे थे।
जैन समाज का सर्वाधिक महत्वपूर्ण नैमित्तिक पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव

पंच कल्याणक समिति के अध्यक्ष मनोज जैन एवं उपाध्यक्ष रमेश चौधरी ने बताया कि पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव जैन समाज का सर्वाधिक महत्वपूर्ण नैमित्तिक महोत्सव है। यह आत्मा से परमात्मा बनने की प्रक्रिया का महोत्सव है। पौराणिक पुरुषों के जीवन का संदेश घर-घर पहुँचाने के लिए इन महोत्सवों में पात्रों का अवलम्बन लेकर सक्षम जीवन यात्रा को रेखांकित किया जाता है। पंचकल्याणक के पहले दिन को गर्भ कल्याणक कहते हैं, जिसमें भगवान के जन्म से पहले माता त्रिशला के स्वप्न, उनकी गर्भावस्था की खुशी, और इंद्रों द्वारा दिव्य उत्सव मनाने का वर्णन होता है, जिसके मुख्य कार्यक्रम घट यात्रा, ध्वजारोहण और दीप प्रज्वलन होते हैं, और यह समारोह आत्मा के कल्याण का मार्ग दिखाता है. पंचकल्याणक महोत्सव का पहला और महत्वपूर्ण कार्यक्रम होता है, जिसमें मंगल कलश पवित्र जल से भरे पात्र निकाले जाते हैं और भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है. महोत्सव के स्थल पर ध्वज (झंडा) फहराया जाता है, जो शुभता और धर्म की शुरूआत का प्रतीक है. इसके बाद दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया जाता है, जिससे ज्ञान और अंधकार के नाश का संदेश दिया जाता है.माता के सोलह स्वप्नों जैसे वृषभ, सिंह, सिंहासन और उनके फल का वर्णन किया जाता है, जो तीर्थंकर के भावी जीवन और धर्म प्रचार की ओर इशारा करते है यह दिन इस बात की भी तैयारी होती है कि जन्म के बाद भगवान का सुमेरु पर्वत पर देवों द्वारा अभिषेक किया जाएगा. इस दिन पूरे पंडाल को अयोध्या या किसी अन्य पवित्र नगरी जैसा सजाया जाता है, और भक्तगण आनंदमय नृत्य-संगीत के साथ इस उत्सव में शामिल होते हैं।



