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नक्सलमुक्त बस्तर की नई तस्वीर 20 साल बाद गाड़ियों से पहुंची बारात, बिना अनुमति हुआ विवाह

 


छत्तीसगढ़ प्रयागराज न्यूज़—नक्सलमुक्त बस्तर में अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। कभी माओवाद की दहशत से घिरे जगरगुंडा इलाके में अब खुशियों की वापसी होने लगी है। दो दशक बाद यहां गाड़ियों से बारात पहुंचने की घटना ने पूरे क्षेत्र में नई उम्मीद जगा दी है।
एक समय ऐसा था जब यहां शादी करने के लिए भी नक्सलियों से अनुमति लेना अनिवार्य होता था। रिश्ते जोड़ने से लेकर बारात में शामिल लोगों की संख्या, कार्यक्रम का समय और वापसी तक की जानकारी देनी पड़ती थी। यहां तक कि सरकारी कर्मचारियों को शादी में बुलाने से भी लोग डरते थे।
नक्सल प्रभाव के चलते केवल शादी-ब्याह ही नहीं, बल्कि दुख के समय भी लोग इस क्षेत्र में आने से कतराते थे। बीमार या मृत परिजनों के पास जाना भी जोखिम भरा माना जाता था। धार्मिक अनुष्ठान और सामाजिक कार्यक्रम भी पूरी तरह प्रभावित थे।
लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। नक्सल प्रभाव लगभग खत्म होने के बाद लोग अपने गांवों की ओर लौटने लगे हैं और सामाजिक रिश्ते फिर से मजबूत हो रहे हैं।
हाल ही में जगरगुंडा से करीब 10 किलोमीटर दूर कामाराम गांव में दंतेवाड़ा के गोंगपाल गांव से बारात पहुंची। वर्ष 2005 के बाद यह पहला मौका था जब यहां गाड़ियों के साथ धूमधाम से बारात आई। इस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए गांव में भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
यह घटना न केवल एक शादी, बल्कि बदलते बस्तर की नई शुरुआत और सामान्य जीवन की वापसी का प्रतीक बन गई है।

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