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छत्तीसगढ़लोकल न्यूज़

माघी पुन्नी पर प्रगटोत्सव पर होंगे भगवान राजीवलोचन जी के मनोहारी स्वरूप के दिव्य दर्शन

पुरी से भगवान जगन्नाथ के पहुंचने पर चढ़ेगा पताका

  • राजिम / नवापारा। प्रतिवर्ष होने वाले राजिम कुंभकल्प मेला आज रविवार को संगम नदी में श्रद्धालुओं के पुण्य स्नान से प्रारंभ होगा। छत्तीसगढ़ के प्रयागराज राजिम में माघी पुन्नी स्नान करने शनिवार की शाम से लोगों का पहुंचना शुरू हो गया है। जलसंसाधन विभाग द्वारा श्रद्धालुओं के पुण्य स्नान हेतु नदी में पानी छोड़ दिया गया है। एक ओर जहां साधु संतों के स्नान हेतू अलग से शाही कुंड बनाया गया है। वहीं हजारों श्रद्धालुओं के स्नान के मुद्देनजर लंबा कुंड बनाया गया है। स्नान पश्चात श्रद्धालु रेत से शिवलिंग की प्रतिकृति बना कर पूजा अर्चना करेंगे। दीप प्रवाहित करेंगे। तत्पश्चात पैरी नदी के तट पर स्थित भगवान श्री राजीवलोचन मंदिर और संगम नदी के मध्य स्थित श्री कुलेश्वर महादेव मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भी श्रद्धालु जन दर्शन पूजन करेंगे।उल्लेखनीय है कि माघी पुन्नी के दिन भगवान श्री राजीवलोचन का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। 1 फरवरी दिन रविवार को माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर भगवान श्री राजीवलोचन का प्रगटोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। सुबह 3 मंदिर का पट खुल जाएगा। सबसे पहले सतधारा अभिषेक किया जाएगा जिसमें गंगाजल से स्नान कराया जाएगा। रूप से दूध, में दही, शहद, मधुरस, चंदन, घी, मसक्कर स्नान प्रयुक्त किए जाएंगे। पश्चात की, शक्करस्ताव में पीला पीतांबर पहनेगी। नया नए कपडे का पहट 5:00 बजे आम श्रद्धालुओं के लिए पट खुलेगा और भगवान श्री राजीवलोचन के दिव्य रूप धारण करेंगे। इस मौके पर बाल स्वरूप में सुबह से लेकर रात्रि 10:00 बजे तक दर्शन देंगे। दोपहर 12:00 बजे तक उड़ीसा के पुरी से महाप्रभु जगन्नाथ पहुंचेगे तथा पताका चढ़ाया जाएगा। जिस समय पताका चढ़ाते हैं,उस वक्त श्रद्धालुओं की भीड़ कुछ समय के लिए थम जाती है। हर तरफ राजीवलोचन तथा महाप्रभु का जयकारा होता रहता है। पुजारी महेंद्र सिंह ठाकुर, राजेंद्र सिह ठाकुर ने बताया कि माघ पूर्णिमा को पुरी के जगन्नाथ का पट बंद रहता है। वह सीधे राजिम चले आते हैं। रात्रिकाल में शयन आरती होगा।

*उड़ीसा और छत्तीसगढ़ की मिश्रित संस्कृति

उल्लेखनीय है कि उड़ीसा और छत्तीसगढ़ की मिश्रित संस्कृति का एक लाजवाब नमूना देखने को मिलता है। दोनों प्रदेश कि सांस्कृतिक विरासत एक सा प्रतीत होता है। माना जाता है कि भगवान श्री राजीवलोचन के दर्शन पश्चात महाप्रभु जगन्नाथ का दर्शन अनिवार्य माना गया है। जो भक्त राजीवलोचन का दर्शन करते हैं वह जगन्नाथ का दर्शन करने के लिए जरूर उपस्थित होते हैं इसीलिए उड़ीसा के श्रद्धालु बड़ी संख्या में साल भर राजिम दर्शन पूजन के लिए पहुंचते रहते हैं। बताना होगा कि छत्तीसगढ़ देवभोग से महाप्रभु के लिए चावल सप्लाई होता है यहीं के चावल से भोग लगता है। जो व्यक्ति पुरी तक नहीं पहुंच पाते हैं वह भगवान राजीवलोचन का दर्शन करने के बाद मंदिर के दाहिने तरफ स्थित जगन्नाथ मंदिर में पहुंचकर दर्शन पूजन करते हैं। धर्म नगरी राजिम में मुख्य रूप से भगवान विष्णु के स्वरूप राजीवलोचन के दर्शन दर्शन पूजन सुबह से लेकर रात्रिकाल तक जारी रहता है। यहां स्थित त्रिवेणी संगम के पंचमुखी कुलेश्वर नाथ महादेव का भी दर्शन किया जाता है। हरि और हर दोनों के दर्शन के लिए श्रद्धालु अपने बारी का इंतजार करते हैं। भगवान विष्णु के अन्य मंदिरों में छोटे राजीवलोचन, दत्तात्रेय मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, रामचंद्र देवल, सूर्य नारायण मंदिर के साथ ही महादेव के भूतेश्वर नाथ महादेव मंदिर, पंचेश्वरनाथ महादेव मंदिर, राजराजेश्वर नाथ महादेव मंदिर, दान दानेश्वरनाथ महादेव मंदिर, राजिम भक्तिन माता मंदिर, गरीबनाथ मंदिर, सोमेश्वर नाथ महादेव मंदिर, आदिशक्ति मां महामाया मंदिर इत्यादि में भीड़ बनी रहती है।

*श्रद्धालुओं में पिड़िया प्रसाद की विशेष मांग*

देशभर के मंदिरों से हटकर पिडिया प्रसाद बनाया जाता है। जो शुद्ध खाद्य पदार्थों को मिलाकर बनाते है। इसमें मुख्य रूप से चावल की उपयोगिता अधिक रहती है। बताया जाता है कि यह प्रसाद महीने भर तक खराब नहीं होता है। मंदिरों में आकर्षक लगाई गई है जो शाम होते ही देखते ही बनती हैं। श्रद्धालुओं को तकलीफ ना हो इसलिए परिसर में पंडाल लगाया गया है।

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