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“नवलगोल बंधी राम-राम समधी…” गीत से रिश्तों की मिठास और सामाजिक संदेश का सुंदर संगम राजिम।

छत्तीसगढ़ प्रयागराज न्यूज़ राजिम —कुंभ कल्प के पांचवें दिन मुख्य मंच पर छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति की अनुपम छटा देखने को मिली। लोकमहक खल्लारी की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने दर्शकों को पारंपरिक रंगों, लोकगीतों और नृत्य शैलियों से सराबोर कर दिया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकारों की मनोहारी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को अपनी सीटों पर बैठे-बैठे थिरकने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना “गाईये गणपति गज वंदन…” से हुई। विघ्नहर्ता की वंदना से वातावरण भक्तिमय हो गया। इसके पश्चात मां शारदे की आराधना में प्रस्तुत गीत “तै नाचत आवे न…” ने मंच को भक्ति रस से भर दिया। देशभक्ति से ओत-प्रोत गीत “जन गण मन अधिनायक… जय बोलो भारत माता” ने दर्शकों में राष्ट्रप्रेम का संचार किया।

लोकजीवन और प्रेम से जुड़े छत्तीसगढ़ी गीत “बड़े बिहनियां कौंवा करे कौव…” तथा “तोर गुरतुर बोली मोर मन ल मोही डारे…” ने श्रोताओं का मन मोह लिया। कर्मा नृत्य की प्रस्तुति में कलाकारों ने “चाहे तै मन ल तोड़ ले, चाहे तै दिल ल तोड़ ले…” गीत पर शानदार नृत्य प्रस्तुत किया, जिस पर दर्शक खुद को झूमने से रोक नहीं पाए।
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और रोचक क्षण “नवलगोल बंधी राम-राम समधी…” गीत की प्रस्तुति रही। नोक-झोंक से भरे इस गीत ने दर्शकों को गुदगुदाने के साथ-साथ पारिवारिक रिश्तों की मिठास और सामाजिक समरसता का सुंदर संदेश दिया। प्रत्येक प्रस्तुति के बाद तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा पंडाल गूंज उठा।
कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावशाली संचालन मनोज सेन ने किया। अंत में कलाकारों का सम्मान राजिम विधायक रोहित साहू एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा स्मृति चिन्ह और गुलदस्ता भेंट कर किया गया।

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