कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है : पंडित संजय पांडे
कर्म प्रधान विश्व रची राखा, जो जस करही सो तस फल चखा”

छत्तीसगढ़ प्रयागराज न्यूज़
राजिम। नगर के वार्ड क्रमांक 2 में स्वर्गीय श्री ईश्वरी प्रसाद मिश्रा की स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर कथावाचक पंडित संजय पांडे ने श्रद्धालुओं को धर्म और कर्म के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि “कर्म प्रधान विश्व रची राखा, जो जस करही सो तस फल चखा” अर्थात प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्मों के अनुसार ही फल भोगना पड़ता है। अच्छे कर्म का फल अच्छा और बुरे कर्म का फल बुरा ही होता है।
पंडित संजय पांडे ने वामन अवतार की कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि राजा बलि ने वामन भगवान को तीन पग भूमि दान देने का संकल्प लिया था। उस समय उनके गुरु शंकराचार्य ने इस संकल्प में बाधा डालने का प्रयास किया, जिसके कारण उन्हें अपनी एक आंख गंवानी पड़ी। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति दान दे रहा हो तो उसमें बाधा नहीं डालनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति दान देने का संकल्प करके उसे लंबे समय तक रोक कर रखता है, उसे अनेक प्रकार की यातनाएं सहनी पड़ती हैं। इसलिए दान का संकल्प लेने के बाद उसे तत्काल पूर्ण करना चाहिए।
कथा के दौरान पंडित जी ने राजा दशरथ और श्रीराम जन्मोत्सव का भी सुंदर वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का चरित्र मर्यादा पुरुषोत्तम का है, इसलिए हमें भी अपने जीवन में मर्यादा का पालन करते हुए समुचित आचरण करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान प्रत्येक युग में अवतार लेकर पापियों का नाश करते हैं और धर्म की स्थापना करते हैं।
भागवत कथा में कृष्ण जन्म के प्रसंग पर “मुख मुरली बजाए” भजन गूंजने लगा, जिस पर श्रद्धालु भक्तिभाव में झूम उठे। इस अवसर पर मोहल्ले के सभी श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।




