पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर मां परमेश्वरी मंदिर में लक्ष्मी-नारायण सहस्त्राभिषेक एवं कथा का भव्य आयोजन


छत्तीसगढ़ प्रयागराज न्यूज़ नवापारा राजिम– पुरुषोत्तम मास के पावन एवं दुर्लभ अवसर पर नगर के मध्य स्थित मां परमेश्वरी मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण के बीच लक्ष्मी-नारायण सहस्त्राभिषेक एवं पुरुषोत्तम मास कथा का भव्य आयोजन किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर भगवान श्रीहरि विष्णु एवं माता लक्ष्मी की आराधना की तथा कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ सहस्त्राभिषेक
कार्यक्रम की शुरुआत विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ लक्ष्मी-नारायण सहस्त्राभिषेक से हुई। श्रद्धालुओं ने भगवान का पंचामृत, दुग्ध, गंगाजल एवं विभिन्न पवित्र द्रव्यों से अभिषेक कर सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की। मंदिर परिसर में गूंजते मंत्रों और भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

पुरुषोत्तम मास का महत्व बताया
कथा वाचन के दौरान श्रद्धालुओं को पुरुषोत्तम मास की महिमा का विस्तृत वर्णन किया गया। कथा वाचक पंडित दिनेश तिवारी ने बताया कि सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास को भगवान विष्णु का प्रिय मास माना गया है। इस माह में किए गए जप, तप, दान, व्रत, पूजा-पाठ एवं सत्संग का विशेष फल प्राप्त होता है। कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण एवं विष्णु भगवान की विभिन्न लीलाओं का वर्णन करते हुए धर्म, सेवा, सदाचार और मानव कल्याण का संदेश दिया गया।
कथावाचक ने कहा कि पुरुषोत्तम मास आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और ईश्वर से जुड़ने का श्रेष्ठ अवसर है। इस दौरान श्रद्धापूर्वक भगवान का स्मरण करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
श्रद्धालुओं ने लिया कथा श्रवण का लाभ
आयोजन में हेमंत देवांगन, पूनम देवांगन, दर्शन देवांगन, पूर्णिमा देवांगन, भागवत देवांगन, कविता देवांगन, दिनेश देवांगन एवं लता देवांगन सहित अनेक श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई। सभी ने भक्तिभाव से पूजा-अर्चना कर कथा श्रवण किया तथा आयोजन की सफलता के लिए भगवान से प्रार्थना की।
भक्ति एवं श्रद्धा का बना केंद्र
पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भाग लेकर भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। अंत में आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
मां परमेश्वरी मंदिर में आयोजित यह धार्मिक अनुष्ठान नगरवासियों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा, सामाजिक एकता और सनातन संस्कृति के संरक्षण का प्रेरणादायी माध्यम बना।




