एक ठंडे ग्रह के लिए वैश्विक कार्रवाई” का संदेश लेकर आगे बढ़ रही प्रकृति शिक्षण विज्ञान यात्रा

छत्तीसगढ़ प्रयागराज न्यूज़ नवापारा राजिम– ओजोन परत पृथ्वी के जीवन का प्राकृतिक सुरक्षा-कवच है, जो सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से जीव-जगत की रक्षा करती है। ओजोन परत के क्षरण की वैश्विक चुनौती को देखते हुए वर्ष 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल अस्तित्व में आया। इसके बाद जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए वर्ष 2016 में किगाली संशोधन अपनाया गया, जिसके तहत शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस एचएफसीएस के उत्पादन एवं खपत को चरणबद्ध रूप से कम करने का लक्ष्य रखा गया।
इसी वैश्विक प्रयास को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रकृति शिक्षण विज्ञान यात्रा लगातार पर्यावरण जागरूकता अभियान चला रही है। टीम का संदेश है कि प्रकृति के प्रति छोटे-छोटे बदलाव मिलकर बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।
बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन के बीच टीम लोगों को ऊर्जा-कुशल एवं पर्यावरण-अनुकूल तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। अभियान के तहत वृक्षारोपण, सीड बॉल निर्माण, जल एवं मिट्टी संरक्षण, प्लास्टिक प्रदूषण के विरुद्ध जागरूकता, जैव-विविधता संरक्षण, पक्षियों के लिए जल एवं आवास तथा सतत ऊर्जा जैसे विषयों पर गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
इस अभियान में लखन साहू, बृजलाल मांडवी, अशोक जंघेल, भुनेश्वर मरकाम, मनीष कुमार अहीर, पूरन लाल साहू, समीक्षा गायकवाड़, लीना ठाकुर, परविंदर कौर गिल सहित टीम के सदस्य सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। अध्यक्ष अभिषेक शुक्ला के नेतृत्व में टीम पर्यावरण संरक्षण का संदेश समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचा रही है।
टीम ने नागरिकों से आह्वान किया कि ओजोन संरक्षण को केवल एक दिवस तक सीमित न रखते हुए ऊर्जा बचत, प्रदूषण में कमी और वृक्ष संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं।




