भानसिंह ध्रुव ने बारहमासी गीत से संजोई छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति


राजिम। राजिम कुंभ कल्प मेला के स्थानीय सांस्कृतिक मंच पर पांचवें दिन गुरुवार 5 फरवरी को लोकसंस्कृति की रंगारंग छटा बिखरी। सुबह 11.30 बजे से शाम 5 बजे तक चले कार्यक्रम में लोकनृत्य, लोकगीत एवं पारंपरिक लोकविधाओं की सशक्त प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सैकड़ों लोक कलाकारों की सहभागिता से मंच छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत केंद्र बन गया।

मगरलोड के सोनवाड़ा गांव से आए भानसिंह ध्रुव ने लोककला मंच पर बारहमासी गीत एवं नृत्य की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा। इसके पश्चात उनके द्वारा प्रस्तुत “राम आएंगे” भजन पर भावपक्ष के कलाकारों ने भगवान श्रीराम के दर्शन का सजीव मंचन कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान गंगोरीपार की राम्हिन बाई ठाकुर ने आदिवासी नृत्य, लाफिन के होमन यादव ने राउत नाचा, आरंग की प्रियांशी तिवारी ने सुवा नृत्य, बरभाठा (महासमुंद) के शिवा सुरदास ने सुगम गायन, गरियाबंद के प्रेम यादव ने आदिवासी नृत्य तथा मरौद के लोकेश्वर साहू ने लोकनृत्य की मनोहारी प्रस्तुति दी।
इसी क्रम में नवागांव के खेलावन सिन्हा, फूलझर की गायत्री राजपूत ने पंडवानी तथा नवापारा के हरिशंकर साहनी ने जगराता के माध्यम से देवी भजनों का भावपूर्ण आगाज किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

पुराने महोत्सव स्थल के नदी मंच पर खमतरई की ललिता साहू ने मानस गान के अंतर्गत धार्मिक भजनों की प्रस्तुति दी। वहीं भैंसातरा के कपिल साहू ने रामायण, मगरलोड की भुवनेश्वरी ने भजन, बहरापाल के नकुल राम साहू तथा बेलटुकरी के देवलाल साहू ने जस झांकी प्रस्तुत कर समां बांध दिया।
कार्यक्रम का संचालन निरंजन साहू, मनोज सेन, दुर्गेश तिवारी एवं किशोर निर्मलकर ने किया। कार्यक्रम प्रभारी पुरुषोत्तम चंद्राकर सहित अधिकारी-कर्मचारी आयोजन को सफल बनाने में जुटे रहे। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित थे, जिन्होंने लोकसंस्कृति से ओतप्रोत इन प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया।

