संस्कृत विषय हटाने के प्रयास पर संस्कृत शिक्षक संघ ने जताई आपत्ति, विधानसभा अध्यक्ष से की मुलाकात

छत्तीसगढ़ प्रयागराज न्यूज़ —संस्कृत शिक्षक संघ ने “संस्कृत विषय बचाओ अभियान” के तहत प्रदेश में संस्कृत विषय की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष दौलतराम साहू सहित विभिन्न पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि माध्यमिक शिक्षा मंडल के पाठ्यक्रम से कक्षा 6वीं से 10वीं तक संस्कृत विषय को हटाने की प्रक्रिया सचिवालय स्तर पर की जा रही है।
संघ के प्रतिनिधिमंडल ने 25 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से मुलाकात कर सूचना के अधिकार (आरटीआई) से प्राप्त जानकारी से अवगत कराया। इस दौरान डॉ. रमन सिंह ने कहा कि “संस्कृत संकल्प की भाषा है, विकल्प की नहीं। इस भाषा के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।”
संघ ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची तथा शिक्षा मंत्री की समीक्षा बैठक के निर्देशों के अनुरूप कक्षा 6वीं से 10वीं तक संस्कृत को अनिवार्य किया जाना चाहिए। साथ ही आरोप लगाया कि बिना किसी लिखित आदेश के संस्कृत विषय के स्थान पर व्यावसायिक शिक्षा लागू की जा रही है, जो संविधान और भारतीय ज्ञान परंपरा की भावना के विपरीत है।
अपनी मांगों को लेकर प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष सहित विभिन्न जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने की जानकारी दी। इस अवसर पर रायपुर, बिलासपुर, बस्तर और दुर्ग संभाग के संस्कृत शिक्षक भी उपस्थित रहे।




