हरितालिका तीज व्रत में पूजा से लेकर खान-पान और पहनावे तक रखें विशेष ध्यान
शिव-पार्वती की आराधना के साथ श्रद्धा, संयम और सुहाग की मंगलकामना का पर्व; जानिए क्या करें और किन बातों से बचें

छत्तीसगढ़ प्रयागराज न्यूज़ नवापारा राजिम– हरितालिका तीज हिंदू धर्म में महिलाओं के प्रमुख व्रत-त्योहारों में से एक है। इस दिन सुहागिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि, दांपत्य सुख और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। इसी आस्था और संकल्प की भावना से महिलाएं हरितालिका तीज का व्रत रखती हैं।
धार्मिक परंपराओं में इस व्रत को श्रद्धा, तप, संयम और पति-पत्नी के मंगल से जुड़ा माना गया है।
ऐसे करें हरितालिका तीज की पूजा
व्रत रखने वाली महिलाएं प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा करें। कई स्थानों पर मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा करने की भी परंपरा है।
पूजा में कलश स्थापना के बाद भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, फूल, अक्षत, चंदन आदि अर्पित किए जाते हैं। माता पार्वती को सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी, चुनरी सहित सुहाग सामग्री अर्पित की जाती है। फल एवं नैवेद्य चढ़ाकर हरितालिका तीज की कथा का श्रवण या वाचन किया जाता है। इसके बाद शिव-पार्वती की आरती कर परिवार की सुख-शांति एवं अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है।
तीज पर कौन से रंग की साड़ी पहनना शुभ माना जाता है?
हरितालिका तीज पर लाल, हरा, पीला और गुलाबी जैसे शुभ रंगों के पारंपरिक परिधान पहनने की परंपरा कई स्थानों पर है। विशेष रूप से लाल रंग को सुहाग और हरा रंग समृद्धि एवं हरियाली का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं अपनी पसंद के साथ-साथ परिवार की परंपरा के अनुसार साड़ी या अन्य पारंपरिक वस्त्र पहन सकती हैं।
वहीं कई परिवारों में धार्मिक पूजा के अवसर पर काले या बहुत गहरे रंग के वस्त्र पहनने से परहेज किया जाता है। हालांकि काला रंग हरितालिका तीज पर पहनना सार्वभौमिक रूप से शास्त्रीय निषेध है, ऐसा कोई एक समान नियम नहीं है। इसलिए इस संबंध में अपनी कुल-परंपरा और स्थानीय मान्यता का पालन करना उचित है।
निर्जला व्रत रखना चाहिए या नहीं?
हरितालिका तीज में अनेक महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। निर्जला व्रत में पूरे दिन अन्न के साथ जल का भी त्याग किया जाता है। इसे कठिन संकल्प और तप के रूप में देखा जाता है। हालांकि स्वास्थ्य की दृष्टि से निर्जला व्रत हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता।
गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों तथा मधुमेह, रक्तचाप, किडनी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या वाले लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए। कमजोरी, चक्कर, अत्यधिक प्यास, उल्टी या तबीयत बिगड़ने की स्थिति में स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना आवश्यक है। धार्मिक आस्था के साथ अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।
नमक और मीठे का क्या नियम है?
जो महिलाएं पूर्ण निर्जला व्रत रखती हैं, वे सामान्यतः नमक, मीठा, फल या किसी भी खाद्य पदार्थ का सेवन नहीं करतीं। वहीं जो महिलाएं फलाहार या जल ग्रहण करके व्रत रखती हैं, वे अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना आदि का सेवन कर सकती हैं।
व्रत के नाम पर अत्यधिक तला-भुना, बहुत मसालेदार या अत्यधिक मीठा भोजन करने से बचना चाहिए। व्रत खोलने के बाद भी अचानक भारी भोजन करने के बजाय हल्का और सुपाच्य भोजन लेना बेहतर माना जाता है।
व्रत के दौरान क्या करना चाहिए?
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें।
घर और पूजा स्थल की स्वच्छता रखें।
भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा करें।
शिवलिंग पर जल एवं बेलपत्र अर्पित करें।
माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित करें।
हरितालिका तीज की कथा सुनें या पढ़ें।
शिव-पार्वती के भजन, मंत्र और स्तुति का स्मरण करें।
संभव हो तो रात्रि जागरण और भजन-कीर्तन करें।
अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अन्य सामग्री का दान करें।
दिनभर मन, वचन और कर्म में संयम एवं सकारात्मक भाव बनाए रखें।
व्रत में किन बातों से बचना चाहिए?
हरितालिका तीज केवल भोजन त्यागने का व्रत नहीं, बल्कि मन और व्यवहार में संयम रखने का भी पर्व माना जाता है। इसलिए व्रत के दौरान क्रोध, झूठ, कटु वचन, विवाद, चुगली और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए।
पूजा सामग्री को स्वच्छ एवं उचित स्थान पर रखना चाहिए। व्रत को दिखावे या प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं बनाना चाहिए। धार्मिक आयोजन के दौरान अनावश्यक मनोरंजन में समय बिताने के बजाय कथा, भजन, ध्यान और शिव-पार्वती के स्मरण में मन लगाना शुभ माना जाता है।
सुहाग सामग्री का विशेष महत्व
हरितालिका तीज पर सुहागिन महिलाएं सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी, कुमकुम, चुनरी, बिछिया आदि सुहाग सामग्री का उपयोग करती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं एक-दूसरे को सुहाग सामग्री भेंट भी करती हैं।
व्रत का पारण भी विधि-विधान से करें
हरितालिका तीज के व्रत का पारण सामान्यतः परिवार और स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार किया जाता है। निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं को पारण के समय अचानक बहुत अधिक भोजन करने से बचना चाहिए। पहले जल या हल्का पेय लेकर धीरे-धीरे सामान्य भोजन की ओर बढ़ना बेहतर रहता है।
श्रद्धा के साथ स्वास्थ्य का भी रखें ध्यान
हरितालिका तीज का मूल भाव भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति श्रद्धा, संयम, दांपत्य सुख और परिवार के मंगल की कामना । अपनी स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार फलाहार या जल ग्रहण करते हुए भी श्रद्धा से व्रत और पूजा की जा सकती है।




