बकली मं नांदिया बैला अउ चुकिया पोरा खेलत दिनभर मस्ती मं रमे ननिहाल मन
पोरा तिहार के रंग मं रंगे गांव के गली-मोहल्ला, छत्तीसगढ़ी परंपरा अउ संस्कृति के दिखे सुंदर झलक

छत्तीसगढ़ प्रयागराज न्यूज़ नवापाराराजिम— छत्तीसगढ़ के पारंपरिक तिहार मन मं पोला तिहार के अपन अलगच महत्त्व हे। खेती-किसानी अउ बैला के सम्मान से जुड़े ये तिहार गांव-गांव मं बड़े उत्साह अउ उमंग के साथ मनाय जाथे। पोला तिहार के अवसर मं बकली गांव के गली-मोहल्ला मं ननिहाल मन के उत्साह देखतेच बनत रहिस। बच्चे दिनभर मिट्टी से बने नांदिया बैला अउ चुकिया पोरा संग खेलत-खेलत तिहार के आनंद लेवत नजर आए।
छत्तीसगढ़ के लोकपरंपरा के अनुसार पोला तिहार मं खेती-किसानी मं महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बैला के पूजा-अर्चना कर सम्मान जताय जाथे। वहीं, बच्चे अपन नन्हें हाथों से सजाए गए माटी के नांदिया बैला, चुकिया-पोरा अउ अन्य पारंपरिक खिलौना संग खेलकर इस तिहार के खुशी मनाथें। बकली मं भी पोला के दिन बच्चे सबेरे ले अपन-अपन नांदिया बैला अउ चुकिया-पोरा लेकर खेल मं जुट गे रहिन।
बच्चों के लिए पोला तिहार केवल एक तिहार नइ, बल्कि माटी, गांव अउ अपन छत्तीसगढ़ी संस्कृति से जुड़ने के एक सुंदर अवसर घलो हे। कोई बच्चा नांदिया बैला ला रस्सी से बांधके दौड़ावत दिखिस, तो कोई चुकिया-पोरा सजाकर अपन संगी-साथी मन संग खेलत नजर आय। गली-मोहल्ला मं बच्चों के हंसी-खुशी अउ खेल-कूद से पूरा माहौल तिहारमय हो गे रहिस।
इस दौरान बच्चे तरुण कुमार साहू, समीर कुमार साहू, भानु प्रताप साहू, देवेंद्र कुमार साहू, महिंद्रा कुमार साहू, सूर्य सेन, नरेंद्र कुमार यादव, पप्पू यादव, राकेश कुमार साहू एवं चंदन तारक साहू ने बताइस कि पोला तिहार के उन्हें हर साल बेसब्री से इंतजार रहिथे। पोला आते ही मन मं अलगच खुशी भर जाथे। माटी के नांदिया बैला अउ चुकिया-पोरा संग खेलना उनकर सबसे पसंदीदा हिस्सा हे।
बच्चों के कहना रहिस कि “पोला के दिन कब आथे, येकर इंतजार हमन ला रहिथे। तिहार के दिन बिहान ले बैला दौड़ावत अउ चुकिया-पोरा खेलत-खेलत पूरा दिन कब बीत जाथे, पता ही नइ चलय।” बच्चों के चेहरों मं तिहार के खुशी साफ नजर आवत रहिस।
गांव के बुजुर्ग मन बताथें कि आधुनिक समय मं जहां मोबाइल, टीवी अउ इंटरनेट के कारण पारंपरिक खेल-कूद धीरे-धीरे कम होवत जावत हे, वहीं पोला तिहार जैसे पारंपरिक पर्व बच्चों ला अपन संस्कृति, लोकपरंपरा अउ माटी से जोड़े रखे के काम करथें। नांदिया बैला अउ चुकिया-पोरा संग खेलना केवल मनोरंजन नइ, बल्कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन अउ कृषि संस्कृति के पहचान ला अगली पीढ़ी तक पहुंचाए के माध्यम घलो हे।
पोला तिहार के अवसर पर बकली मं बच्चों के उत्साह अउ उमंग ने एक बार फिर ये संदेश देय कि छत्तीसगढ़ के माटी मं बसे लोकपर्व आज भी नई पीढ़ी के मन मं उतनेच जीवंत हैं। ननिहाल मन के खेल-कूद अउ हंसी-खुशी से गांव के माहौल मं छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग अउ गाढ़ा हो गे।




