शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता, उसके ज्ञान और संस्कार सदैव समाज का मार्गदर्शन करते हैं –अतुल शर्मा
संकुल केंद्र टीला में सेवानिवृत्त शिक्षक अवधेश सिंह ठाकुर एवं स्थानांतरित शिक्षक ताम्रध्वज साहू को दी भावभीनी विदाई

छत्तीसगढ़ प्रयागराज न्यूज़ नवापारा राजिम /टीला– संकुल केंद्र टीला में नोडल प्राचार्य ज्योति अवधिया के मार्गदर्शन में सेवानिवृत्त शिक्षक अवधेश सिंह ठाकुर एवं स्थानांतरित शिक्षक ताम्रध्वज साहू के सम्मान में संकुल स्तरीय विदाई समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों ने दोनों के कार्यकाल, कर्तव्यनिष्ठा, सरल व्यवहार एवं शिक्षा के प्रति समर्पण को याद करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नोडल प्राचार्य ज्योति अवधिया ने कहा कि शिक्षक केवल विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिक्षक अपने विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम का ज्ञान ही नहीं देता, बल्कि उन्हें संस्कार, अनुशासन, नैतिकता और जीवन मूल्यों की सीख भी देता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक सेवा में रहते हुए विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करता है और सेवानिवृत्ति के बाद भी उसके अनुभव एवं विचार समाज के लिए प्रेरणास्रोत बने रहते हैं।

व्याख्याता पी.सी. साहू ने दोनों शिक्षकों के साथ बिताए कार्यकाल को स्मरण करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं सेवाभाव की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यालय परिवार से किसी शिक्षक का विदा होना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा क्षण होता है। वर्षों तक साथ काम करने वाले सहकर्मी जब अलग होते हैं तो उनकी यादें सदैव मन में बनी रहती हैं।
इस अवसर पर प्रधान पाठक आर.के. लासेल, योगेंद्र ध्रुव, राजकुमार साहू, बसंत साहू एवं पोमन तारक ने भी अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने सेवानिवृत्त शिक्षक अवधेश सिंह ठाकुर के दीर्घ सेवाकाल को याद करते हुए उनके योगदान की प्रशंसा की तथा स्थानांतरित शिक्षक ताम्रध्वज साहू के नए कार्यस्थल के लिए शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम का संचालन अतुल शर्मा ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता, केवल उसकी सेवा का स्वरूप बदलता है। उसके द्वारा बांटा गया ज्ञान, दिए गए संस्कार और विद्यार्थियों के जीवन में छोड़ी गई छाप हमेशा जीवित रहती है।” उन्होंने कहा कि एक शिक्षक अपने विचारों और कर्मों के माध्यम से पीढ़ियों को प्रभावित करता है और यही उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि होती है।
कार्यक्रम के दौरान वातावरण भावुक एवं आत्मीय रहा। संकुल परिवार की ओर से दोनों शिक्षकों को सम्मान एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, सुखद एवं मंगलमय भविष्य की कामना की गई।




