छत्तीसगढ़

मेडिकल एस्ट्रोलॉजी एवं भारतीय संस्कृति के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना प्रमुख लक्ष्य

ज्योतिष के क्षेत्र में डॉ. दीर्घायु रायचूरा ने हासिल की पीएचडी की उपाधि

छत्तीसगढ़ प्रयागराज न्यूज़ नवापारा राजिम —ज्योतिष के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि हासिल करते हुए धमतरी निवासी राजेश रायचूरा के सुपुत्र दीर्घायु रायचूरा ने ज्योतिष विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। उन्हें यह उपाधि उदयपुर स्थित श्री महर्षि कॉलेज ऑफ वैदिक एस्ट्रोलॉजी द्वारा प्रदान की गई। पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने के बाद अब वे डॉ. दीर्घायु रायचूरा के नाम से जाने जाएंगे। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, शुभचिंतकों एवं परिचितों में हर्ष का माहौल है।

‘चंद्रमा का गोचर एवं चिकित्सा ज्योतिष’ रहा शोध का विषय

डॉ. दीर्घायु रायचूरा का शोध विषय “Transit of Moon and Medical Astrology” (चंद्रमा का गोचर एवं चिकित्सा ज्योतिष) रहा। अपने शोध के माध्यम से उन्होंने चंद्रमा के गोचर और चिकित्सा ज्योतिष से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया। यह उपलब्धि उनके शैक्षणिक एवं शोधपरक सफर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।

डॉ. रायचूरा का कहना है कि वे अपनी शोध उपलब्धि को केवल अकादमिक उपाधि तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि इसके माध्यम से समाज में जागरूकता और सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देना चाहते हैं।

मेडिकल एस्ट्रोलॉजी के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर

डॉ. रायचूरा का विशेष उद्देश्य मेडिकल एस्ट्रोलॉजी के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना है। उनका प्रयास रहेगा कि भारतीय ज्योतिषीय परंपराओं में स्वास्थ्य से जुड़े पारंपरिक विचारों को व्यवस्थित एवं जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से लोगों तक पहुंचाया जाए।

उनका मानना है कि किसी भी ज्ञान का उद्देश्य समाज को जागरूक करना और सही दिशा में मार्गदर्शन देना होना चाहिए। साथ ही वे इस बात पर भी जोर देते हैं कि स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या में चिकित्सकीय परामर्श, आवश्यक जांच और आधुनिक चिकित्सा का महत्व सर्वोपरि है। मेडिकल एस्ट्रोलॉजी को चिकित्सा के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि पारंपरिक ज्ञान एवं अध्ययन के एक क्षेत्र के रूप में देखा जाना चाहिए।

सामान्य ज्योतिष और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण की दिशा में करेंगे कार्य

डॉ. दीर्घायु रायचूरा का कार्यक्षेत्र केवल मेडिकल एस्ट्रोलॉजी तक सीमित नहीं रहेगा। वे सामान्य ज्योतिष, ग्रहों के गोचर, जीवन के विभिन्न पहलुओं से जुड़े ज्योतिषीय अध्ययन तथा भारतीय पारंपरिक ज्ञान के प्रसार की दिशा में भी कार्य करने की इच्छा रखते हैं।

उनका उद्देश्य ज्योतिष के विभिन्न आयामों को लोगों तक पहुंचाने के साथ ही इस विषय के अध्ययन को अधिक व्यवस्थित और शोधपरक बनाने की दिशा में योगदान देना है।

भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराओं के प्रति जागरूकता भी लक्ष्य

डॉ. रायचूरा भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराओं, भारतीय ज्ञान-विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति नई पीढ़ी में जागरूकता बढ़ाने को भी अपने प्रमुख उद्देश्यों में शामिल करते हैं। उनका मानना है कि युवा पीढ़ी को देश की प्राचीन ज्ञान परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के लिए अध्ययन, संवाद और सकारात्मक सामाजिक सहभागिता आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि भारतीय ज्योतिष प्राचीन भारतीय ज्ञान-परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका अध्ययन जिम्मेदारी, विवेक और परंपराओं के प्रति सम्मान के साथ किया जाना चाहिए।

परिवार एवं शुभचिंतकों में खुशी

डॉ. दीर्घायु रायचूरा की इस उपलब्धि पर उनके परिवार, मित्रों, शुभचिंतकों एवं परिचितों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। पीएचडी की उपाधि उनके शैक्षणिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वे भविष्य में ज्योतिष, मेडिकल एस्ट्रोलॉजी, जनजागरूकता तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन एवं प्रसार के क्षेत्र में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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