चार साल से मधुमेह से जूझ रही आठ वर्षीय आदिवासी बच्ची, परिवार ने इलाज के लिए लगाई मदद की गुहार

रोजाना तीन बार इंसुलिन पर निर्भर ऋतंबरा, रायपुर में भी कराया उपचार; आर्थिक तंगी के बीच परिवार को सहयोग की उम्मीद
छत्तीसगढ़ प्रयागराज न्यूज़ — विकासखंड मुख्यालय मैनपुर से करीब तीन किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत गोपालपुर के आश्रित ग्राम छुईया की आठ वर्षीय आदिवासी बच्ची ऋतंबरा नेताम पिछले चार वर्षों से मधुमेह (शुगर) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही है। कम उम्र में ही बीमारी की चपेट में आई ऋतंबरा का जीवन अब नियमित इंसुलिन और उपचार पर निर्भर हो गया है।
परिजनों के मुताबिक, ऋतंबरा को पिछले करीब चार वर्षों से लगातार उपचार दिया जा रहा है। उसे प्रतिदिन तीन बार इंसुलिन का इंजेक्शन लगाना पड़ता है। इंसुलिन लेने के बाद ही उसे कुछ राहत मिलती है। बीमारी के कारण बच्ची को नियमित देखभाल और चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता बनी रहती है।
बेटी के बेहतर उपचार की उम्मीद में परिजन उसे रायपुर स्थित बालगोपाल अस्पताल भी लेकर गए, जहां उसका उपचार कराया गया। हालांकि, उपचार के बावजूद बच्ची को अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी। लंबे समय से चल रहे इलाज, इंसुलिन और दवाइयों के खर्च ने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित किया है।
ऋतंबरा के पिता संतोष नेताम ने बताया कि उनकी बेटी अभी महज आठ वर्ष की है और करीब चार साल से बीमारी से पीड़ित है। रोजाना इंसुलिन लगाने के बावजूद परिवार की चिंता कम नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि परिवार अपनी क्षमता के अनुसार लगातार इलाज करा रहा है, लेकिन आर्थिक कठिनाइयों के कारण बच्ची को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में परेशानी हो रही है।
परिवार ने शासन-प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं समाजसेवियों से ऋतंबरा के उपचार में आर्थिक एवं चिकित्सकीय सहयोग की अपील की है। परिजनों को उम्मीद है कि समय पर मदद मिलने से बच्ची को बेहतर उपचार मिल सकेगा और वह बीमारी की परेशानियों से उबरकर सामान्य जीवन की ओर लौट सकेगी।




