कृष्ण-राधा के रूप में सजे नन्हे-मुन्ने, शोभायात्रा में दिखी ब्रज की मनमोहक झलक
ज्ञानदीप शिशु विद्या मंदिर ने निभाई 24 वर्षों की परंपरा, कृष्ण जन्माष्टमी पर निकली भव्य शोभायात्रा


बाल गोपालों की मनमोहक झांकियों ने मोहा मन, दही-हांडी फोड़ने के साथ ढोल-धमाल पर थिरके राधा-कृष्ण

नवापारा राजिम। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर ज्ञानदीप शिशु विद्या मंदिर उत्तर माध्यमिक विद्यालय, नवापारा राजिम की ओर से 24 वर्षों से चली आ रही शोभायात्रा की परंपरा इस वर्ष भी उत्साह और उमंग के साथ निभाई गई। कृष्ण-राधा का रूप धारण किए नन्हे बाल गोपालों ने आकर्षक झांकियां प्रस्तुत कीं। ढोल-धमाल, डांडिया नृत्य, गुलाल और पानी की बौछारों के बीच निकली शोभायात्रा से पूरा नगर कृष्णमय हो गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय परिसर मे समिति के अध्यक्ष संतोष तिवारी एवं प्राचार्य रेखा तिवारी प्रदेश महिला मोर्चा सदस्य योगिता सिन्हा ने भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर किया। उन्होंने नन्हे बाल गोपालों को तिलक लगाकर जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। इसके बाद कृष्ण, राधा और गोप-गोपियों की वेशभूषा में सजे बच्चों ने आकर्षक झांकियों के साथ शोभायात्रा का शुभारंभ किया।
शोभायात्रा विद्यालय प्रांगण से निकलकर गंज रोड और सदर रोड होते हुए नगर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से गुजरी। जगह-जगह नगरवासियों ने भगवान श्रीकृष्ण और राधा के रूप में सजे बच्चों का स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों और धमाल की गूंज के बीच बच्चे नृत्य करते हुए आगे बढ़ते रहे। “बाजे ढोल बाजे” और “आला रे आला, गोविंदा आला रे” जैसे गीतों पर नन्हे बाल गोपालों तथा राधा-कृष्ण के रूप में सजे बच्चों ने जमकर नृत्य किया।
शोभायात्रा के दौरान चारों ओर गुलाल की रंगीन फुहारें उड़ती रहीं। पानी की बौछारों ने उत्सव के उल्लास को और बढ़ा दिया। दही-हांडी आयोजन को लेकर बच्चों और नगरवासियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। नगर के विभिन्न स्थानों पर बांधी गई दही-हांडी को बच्चों ने उत्साहपूर्वक फोड़ा। हांडी फूटते ही “जय श्रीकृष्ण” और “नंद के घर आनंद भयो” के जयघोष से वातावरण गूंज उठा।
24 वर्षों से कायम है कृष्ण जन्माष्टमी शोभायात्रा की परंपरा
विद्यालय द्वारा लगातार 24 वर्षों से कृष्ण जन्माष्टमी पर शोभायात्रा निकालने की परंपरा निभाई जा रही है। इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं तथा भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और आदर्शों से परिचित कराने का प्रयास किया जाता है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में हर साल विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और नगरवासियों की सहभागिता बढ़ रही है।
इस अवसर पर नन्हे बच्चों की मनमोहक वेशभूषा और आकर्षक झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। बाल कृष्ण के रूप में सजे बच्चों को देखकर अभिभावक और नगरवासी भावविभोर नजर आए। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
कार्यक्रम में विद्यालय की मुख्य संयोजक पूर्णिमा पाल, किरण वर्मा, गीतांजलि नेताम माधवी देवांगन, कावेरी निषाद, पायल कंसारी, भुवनेश्वरी कंसारी, ललिता चक्रधारी एवं खिलेश्वरी साहू सहित समस्त शिक्षकों ने सक्रिय योगदान दिया। वहीं दही-हांडी और शोभायात्रा की व्यवस्थाओं में चेतन चौहान, सुनील कंसारी एवं पुरुषोत्तम यादव ने विशेष सहयोग प्रदान किया।
कार्यक्रम का संचालन अशोक कुमार तिवारी ने किया। शिक्षकों और आयोजन समिति के सदस्यों ने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति प्रेम एवं संस्कार विकसित करने के साथ-साथ सामूहिक सहभागिता की भावना को भी मजबूत करते हैं।

ढोल-धमाल, डांडिया, गुलाल, पानी की बौछार, दही-हांडी और नन्हे बाल गोपालों की मनमोहक झांकियों से सजी यह शोभायात्रा नगरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र रही। 24 वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए ज्ञानदीप शिशु विद्या मंदिर की कृष्ण जन्माष्टमी शोभायात्रा ने एक बार फिर नवापारा राजिम में भक्ति और उत्सव का रंग बिखेर दिया।




