छत्तीसगढ़ की धरोहर और विरासत पर प्रकाश, महान सपूतों की जननी है यह धरती : चंद्रशेखर साहू

छत्तीसगढ़ प्रयागराज न्यूज़ नवापारा-राजिम– भाजपा के चम्पारण तामासिवनी मंडल स्तरीय प्रशिक्षण वर्ग के अष्टम सत्र में पूर्व कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध धरोहर और सांस्कृतिक विरासत पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पावन भूमि महान सपूतों की जननी रही है, जिसने देश और समाज को दिशा देने वाले अनेक विभूतियों को जन्म दिया है।
श्री साहू ने बताया कि प्रशिक्षण स्थल चार प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों के मध्य स्थित है। उत्तर दिशा में प्राचीन नगरी आरंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने राजा मोरध्वज और ताम्रध्वज की प्रसिद्ध कथा का जिक्र किया, जो भगवान कृष्ण के अनन्य भक्त थे।
दक्षिण दिशा में स्थित राजिम को उन्होंने अत्यंत पवित्र स्थल बताते हुए कहा कि वनवास काल में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण यहां आए थे। यहां त्रिवेणी संगम पर माता सीता द्वारा स्थापित कुलेश्वर महादेव मंदिर आज भी आस्था का केंद्र है। साथ ही राजिम लोचन मंदिर, लोमष ऋषि आश्रम और भक्तिन माता राजिम का भी उन्होंने उल्लेख किया।
पूर्व दिशा में स्थित सिरपुर को प्राचीन श्रीपुर नगरी बताते हुए उन्होंने कहा कि यह नागवंशी राजाओं की राजधानी रही है। यहां लक्ष्मण मंदिर, बौद्ध विहार और जैन मंदिर आज भी समृद्ध इतिहास की गवाही देते हैं। चीनी यात्री ह्वेनसांग के आगमन का उल्लेख भी उन्होंने किया।
पश्चिम दिशा में चंदखुरी का उल्लेख करते हुए श्री साहू ने बताया कि यह माता कौशल्या की जन्मस्थली है और यहां स्थित कौशल्या मंदिर एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है।
उन्होंने महानदी को पापमोचनी, जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी बताते हुए इसके उद्गम स्थल सिहावा का भी जिक्र किया, जहां ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रही है।
श्री साहू ने बस्तर क्षेत्र की चर्चा करते हुए कहा कि यहां की आदिवासी संस्कृति और परंपरा अद्वितीय है। राजा प्रवीर चंद्र भंजदेव ने अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए बलिदान दिया, जिसे हमेशा याद रखा जाएगा।
अपने संबोधन में उन्होंने गुरु घासीदास बाबा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने गिरौदपुरी धाम में जन्म लेकर सतनाम पंथ की स्थापना की और “मनखे-मनखे एक समान” का संदेश दिया। साथ ही पंडित सुंदरलाल शर्मा को अछूतों के उद्धारक बताते हुए उनके योगदान को भी याद किया।
अंत में श्री साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, आस्था और महान विभूतियों की परंपरा इसे देश के महत्वपूर्ण राज्यों में विशेष स्थान दिलाती है।




