जल प्रहरी छात्र-छात्राओं ने संभाली कमान, गांव-गांव पहुंचकर दे रहे जल संरक्षण का संदेश


छत्तीसगढ़ प्रयागराज न्यूज़ कोपरा/कौंदकेरा। भीषण गर्मी के बीच बढ़ते जल संकट को देखते हुए गरियाबंद जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कौंदकेरा के छात्र-छात्राओं ने जल संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायी पहल शुरू की है। जल जीवन अभियान के तहत विद्यालय के विद्यार्थी “जल प्रहरी” बनकर गांव-गांव पहुंच रहे हैं और लोगों को पानी की एक-एक बूंद की महत्ता समझा रहे हैं।
विद्यालय की व्याख्याता मीनाक्षी शर्मा एवं सतीश मालवीय के मार्गदर्शन में कल्पना विज्ञान क्लब एवं अटल टिंकरिंग लैब के छात्र-छात्राओं की अलग-अलग टोलियां बनाई गई हैं। ये टोली सुबह और शाम कौंदकेरा, भैंसातरा, रोहिना, टेका, सेमराडीह और तरीघाट सहित आसपास के गांवों में जाकर जनजागरूकता अभियान चला रही हैं। विद्यार्थियों के हाथों में जल प्रतिज्ञा के पोस्टर हैं और वे ग्रामीणों से सीधे संवाद कर जल बचाने का संदेश दे रहे हैं।

अभियान के दौरान छात्र ग्रामीणों को जल संरक्षण की शपथ भी दिला रहे हैं। शपथ के मुख्य बिंदुओं में पानी की बर्बादी रोकना, उपयोग के बाद नल बंद करना, पानी का सीमित एवं समझदारी से उपयोग करना तथा दूसरों को भी जागरूक करना शामिल है।
इस अभियान की शुरुआत 30 अप्रैल को कलेक्टर बी.एस. उईके द्वारा संयुक्त जिला कार्यालय गरियाबंद में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जल प्रतिज्ञा दिलाकर की गई थी। अब तक 800 से अधिक परिवार जल संरक्षण का संकल्प ले चुके हैं।
विज्ञान क्लब प्रभारी मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे ग्रामीणों को कूलर की टंकी से होने वाले पानी के नुकसान, ओवरफ्लो तथा टपकते नलों जैसी समस्याओं के प्रति जागरूक कर सकें। अभियान का असर अब जमीनी स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। कई घरों में खराब पाइप सुधरवाए गए हैं तथा नलों में नई टोटियां लगाई गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले 20 से 25 फीट की खुदाई में पानी मिल जाता था, लेकिन अब 200 फीट तक बोरवेल करने पर जल स्रोत मिल रहा है। गिरते जल स्तर को देखते हुए ग्रामीणों ने बच्चों की इस पहल की सराहना करते हुए पानी की बर्बादी रोकने का संकल्प लिया है।
विद्यालय के प्राचार्य एम.आर. रात्रे ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस अभियान से बच्चों में नेतृत्व क्षमता, सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित हो रही है।




