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कुएं में गिरा तेंदुआ, रेस्क्यू के बाद गांव में मची अफरा-तफरी

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छत्तीसगढ़ प्रयागराज न्यूज़—-छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के ग्राम जगतरा में शुक्रवार सुबह एक तेंदुआ किसान के खेत स्थित कुएं में गिर गया। घटना की जानकारी मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया। वन विभाग की टीम ने करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद तेंदुए को बाहर निकाला, लेकिन बाहर आते ही तेंदुआ रिहायशी इलाके की ओर भाग निकला, जिससे गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

जानकारी के अनुसार, किसान राम कुमार ठाकुर शुक्रवार सुबह करीब 6:30 बजे अपनी बाड़ी में सब्जियों को पानी देने पहुंचे थे। इसी दौरान उन्हें कुएं से हलचल और फड़फड़ाने की आवाज सुनाई दी। जब उन्होंने कुएं में झांककर देखा तो उसमें एक तेंदुआ मोटर पाइप के सहारे लटका हुआ नजर आया। किसान ने तत्काल गांव के कोतवाल और सरपंच को इसकी सूचना दी।

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जेसीबी और खाट के सहारे किया गया रेस्क्यू

सुबह करीब 8 बजे वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और 9 बजे से रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। करीब 12:10 बजे जेसीबी मशीन में खाट बांधकर कुएं में उतारी गई। तेंदुआ खाट पर चढ़ गया और उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

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हालांकि, बाहर आते ही तेंदुए ने अचानक छलांग लगा दी और गांव की ओर भाग निकला। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। तालाब किनारे खड़े कई ग्रामीण डर के मारे पानी में कूद गए। बाद में तेंदुआ धान के खेत में छिप गया। शाम करीब 5 बजे उसे बालोद-धमतरी मुख्य मार्ग के पास एक खेत में फिर देखा गया।

बिना ट्रेंकुलाइज किए रेस्क्यू पर उठे सवाल

घटना के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए को बिना ट्रेंकुलाइज किए बाहर निकालना बड़ी लापरवाही थी। यदि पहले उसे बेहोश किया जाता, तो गांव में दहशत और भगदड़ जैसी स्थिति नहीं बनती। तेंदुए के रिहायशी इलाके में पहुंचने से महिलाएं और बच्चे सहमे हुए हैं।

20 गांवों में अलर्ट, धारा 163 लागू

वन विभाग और प्रशासनिक टीम अब आसपास के करीब 20 गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क कर रही है। ग्राम जगतरा और आसपास के क्षेत्रों में धारा 163 लागू कर दी गई है। प्रशासन ने भीड़ लगाने, फोटो-वीडियो बनाने और जंगल की ओर जाने पर रोक लगा दी है।

पानी की तलाश में गांव पहुंचा था तेंदुआ

वन विभाग के अनुसार तेंदुआ करीब तीन साल का है। बालोद जिले के गुरुर, डौंडी और बालोद ब्लॉक के चट्टानी क्षेत्रों में पहले भी तेंदुओं की मौजूदगी देखी जाती रही है। माना जा रहा है कि भीषण गर्मी और पानी की तलाश में तेंदुआ गांव तक पहुंच गया था, जहां वह कुएं में गिर गया।

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