व्याख्याता गीतिका शर्मा को पीएचडी की उपाधि, शिक्षा जगत में गौरव का क्षण

छत्तीसगढ़ प्रयागराज न्यूज़राजिम-— स्कूल ऑफ एजुकेशन, मैट्स विश्वविद्यालय रायपुर (छत्तीसगढ़) से व्याख्याता श्रीमती गीतिका शर्मा को पीएचडी की उपाधि प्राप्त हुई है। इस उपलब्धि पर शिक्षा जगत एवं उनके शुभचिंतकों में हर्ष का माहौल है। पूर्व में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राजिम में अंग्रेजी विषय की व्याख्याता रहीं श्रीमती शर्मा ने अपनी सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में श्रीमद्भगवद्गीता का विशेष स्थान है, जो केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन जीने की कला, नैतिकता, कर्तव्यबोध एवं आत्मबोध का मार्गदर्शन करती है।
गीता के अध्ययन से विद्यार्थियों में सकारात्मक मूल्यों का विकास
अपने शोध विषय “श्रीमद्भगवद्गीता दर्शन के अध्ययन का विद्यार्थियों की आध्यात्मिक बुद्धि एवं व्यक्तिगत मूल्यों पर प्रभाव का अध्ययन” पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि गीता का अध्ययन छात्रों में आत्मबोध, विवेकशीलता, सहानुभूति, सत्यनिष्ठा एवं सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करता है। उनके शोध में यह भी स्पष्ट हुआ कि गीता का अध्ययन करने वाले एवं न करने वाले विद्यार्थियों के मूल्यों में उल्लेखनीय अंतर पाया जाता है। यह शोध समाज एवं राष्ट्र निर्माण की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपना शोध कार्य डॉ. संगीता शराफ के निर्देशन तथा डॉ. परविंदर हंसपाल एवं डॉ. संजीत तिवारी के मार्गदर्शन में पूर्ण किया। इस उपलब्धि को उन्होंने अपने प्रेरणास्त्रोत पूज्य श्रीहित अम्बरीष जी, वृन्दावन धाम को समर्पित किया।
डॉ. गीतिका शर्मा, श्री फतेह चंद शर्मा एवं श्रीमती गिरिजा शर्मा की पुत्री, श्री रामप्रसाद शर्मा एवं श्रीमती कमला शर्मा की पुत्रवधू तथा श्री श्रवण शर्मा की धर्मपत्नी हैं। उनकी इस उपलब्धि पर विद्यालय परिवार, छत्तीसगढ़ संयुक्त शिक्षक संघ के पदाधिकारियों, शुभचिंतकों एवं छात्रों ने बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।




