गेंड़ी दौड़ से छत्तीसगढ़ी पकवानों तक, सेजेस राजिम में दिखा हरेली का उत्साह

पारंपरिक खेलों में विद्यार्थियों ने दिखाया उत्साह, चौसेला-फरा सहित छत्तीसगढ़ी व्यंजनों से सजी संस्कृति की झलक
छत्तीसगढ़ प्रयागराज न्यूज़ राजिम—-स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय (सेजेस) राजिम में छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकपर्व हरेली तिहार को परंपरा, उमंग और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक खेलों और खान-पान की परंपराओं से रूबरू कराया गया।
हरेली पर्व के अवसर पर प्राथमिक एवं मिडिल वर्ग के विद्यार्थियों के लिए विभिन्न पारंपरिक खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। अंगेश गंगेले, सरिता साहू, जितेंद्र साहू, डीकर्ण साहू, उपासना भगत, धृति चंद्राकर एवं सुमन राठौर के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने गेंड़ी दौड़, बोरी दौड़, नींबू-चम्मच दौड़, 50 मीटर दौड़ एवं तीन टांग दौड़ में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

गेंड़ी दौड़ सहित अन्य पारंपरिक खेलों में बच्चों का उत्साह देखते ही बना। खेलों के दौरान विद्यालय परिसर में हंसी-खुशी और उल्लास का वातावरण बना रहा। विद्यार्थियों ने पारंपरिक खेलों के माध्यम से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन और लोक परंपराओं से जुड़ने का अनुभव प्राप्त किया।
चौसेला, फरा और गुलगुला भजिया से महकी संस्कृति
वहीं हाई स्कूल के छात्र-छात्राओं के लिए छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजन निर्माण की विशेष गतिविधि आयोजित की गई। व्याख्याता प्रणिती चंद्राकर, साक्षी जपे, नारायण लाल साहू एवं कैलाश साहू के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने चौसेला, फरा, गुलगुला भजिया, चटनी सहित विभिन्न पारंपरिक व्यंजन तैयार किए।
विद्यार्थियों ने स्वयं व्यंजन तैयार कर न केवल पाक-कला का अनुभव प्राप्त किया, बल्कि छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खान-पान और स्थानीय व्यंजनों के महत्व को भी जाना। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया गया।
कार्यक्रम में व्याख्याता विक्रम सिंह ठाकुर, पिंकी तारक, साक्षी चंद्राकर, नेहा सिंह, सताक्षी शर्मा एवं लिलेन्द्र साहू की भी सहभागिता रही। शिक्षकों ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए पारंपरिक खेलों एवं व्यंजन निर्माण में उनका मार्गदर्शन किया।
संस्कृति और परंपरा से जोड़ते हैं ऐसे आयोजन
विद्यालय के प्राचार्य बी.एल. ध्रुव ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कृषि जीवन और परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। विद्यालय में इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति, परंपरा और लोक जीवन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेलों और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को जानने, समझने और उसे आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी में अपनी लोक परंपराओं के प्रति सम्मान और गौरव की भावना विकसित करने में सहायक होते हैं।

हरेली पर्व के आयोजन ने विद्यालय परिसर को पूरी तरह छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग में रंग दिया। पारंपरिक खेलों की उमंग और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की खुशबू के बीच विद्यार्थियों ने हरेली पर्व का आनंद लिया और अपनी संस्कृति से जुड़ने का संदेश भी दिया।




